*राम नाम ही साधना है, साध्य है और समाधान भी-नवजीत भारद्वा*
🔥 जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनि देव महाराज जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान राकेश प्रभाकर से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित प्रभु भक्तों को राम नाम की महिमा का गुणगान करते हुए प्रसिद्ध मंत्र का अनुसरण करते हुए कहते है कि
*राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने*
*इस मंत्र को श्री राम तारक मंत्र भी कहा जाता है। और इसका जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु के 1000 नामों के जाप के समतुल्य है। यह मंत्र श्री राम रक्षा स्तोत्रम् के नाम से भी जाना जाता है।*
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ‘‘राम’’ केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का समग्र सूत्र माना जाता है। संतों, विद्वानों और आम श्रद्धालुओं का मानना है कि ‘‘राम’’ नाम अपने आप में साधना (आत्मिक अभ्यास), साध्य (जीवन का लक्ष्य) और समाधान (समस्याओं का उत्तर) तीनों है। यही कारण है कि आज के तेज़ रफ्तार, तनावग्रस्त और अनिश्चित समय में भी ‘‘राम’’ नाम की प्रासंगिकता लगातार बढ़ती जा रही है।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि आध्यात्मिक साधना में नाम-स्मरण को सबसे सरल और प्रभावी मार्ग माना गया है। ‘‘राम’’ नाम का जप ध्यान, एकाग्रता और आत्मशुद्धि का माध्यम बनता है। योग और भक्ति परंपरा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार नियमित नाम-स्मरण से मन की चंचलता कम होती है, सकारात्मक भाव बढ़ते हैं और व्यक्ति में धैर्य तथा करुणा का विकास होता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि जीवन का अंतिम लक्ष्य—सत्य, धर्म और मानवता के मार्ग पर चलना—‘‘राम’’ के आदर्शों में समाहित है। मर्यादा, न्याय, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण ‘‘राम’’ को साध्य के रूप में स्थापित करते हैं। सामाजिक विचारकों का कहना है कि यदि व्यक्ति अपने आचरण में इन मूल्यों को उतार ले, तो व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में संतुलन स्वत: आ जाता है।
नवजीत भारद्वाज जी प्रभु भक्तों को कहते है कि आज समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है—मानसिक तनाव, पारिवारिक विघटन, सामाजिक वैमनस्य और नैतिक संकट। ऐसे में ‘‘राम’’ नाम समाधान का मार्ग सुझाता है। यह समाधान किसी तात्कालिक उपाय तक सीमित नहीं, बल्कि सोच और व्यवहार में स्थायी परिवर्तन की प्रेरणा देता है। सह-अस्तित्व, संवाद और करुणा—ये सभी समाधान ‘‘राम’’ के विचार में निहित हैं।
धार्मिक आयोजनों, रामकथा, भजन-कीर्तन और सामाजिक अभियानों में ‘‘राम’’ नाम का प्रयोग केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा। कई सामाजिक संगठन इसे नैतिक शिक्षा, नशामुक्ति और सेवा कार्यों से जोडक़र देख रहे हैं। युवाओं में भी इसे मानसिक शांति और आत्मविकास के साधन के रूप में अपनाने की प्रवृत्ति दिख रही है।
नवजीत भारद्वाज जी कहते है कि ‘‘राम’’ नाम भारतीय चेतना का वह केंद्र है जहाँ साधना, साध्य और समाधान एक साथ मिलते हैं। यह न केवल आस्था का विषय है, बल्कि जीवन को बेहतर दिशा देने वाला व्यावहारिक दर्शन भी है। बदलते समय में यही समग्र दृष्टि ‘‘राम’’ को सदैव प्रासंगिक बनाए रखती है।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,सरोज बाला, अमरेंद्र कुमार शर्मा,मुनीष मैहरा,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, विनोद खन्ना, नवीन , प्रदीप,शंकर, संदीप,रिंकू,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।हवन यज्ञ उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।
